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*श्री दादाजी वृद्ध आश्रम में बुजुर्गों संग गरिमा और अपनत्व के साथ मनाया गया गणतंत्र दिवस*

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*श्री दादाजी वृद्ध आश्रम में बुजुर्गों संग गरिमा और अपनत्व के साथ मनाया गया गणतंत्र दिवस*

खंडवा।सेवा, संस्कार और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक *श्री दादाजी वृद्ध आश्रम* एक बार फिर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना, जहां 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का पर्व बुजुर्गों के साथ आत्मीयता और सम्मान के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत *झंडावंदन एवं राष्ट्रगान* के साथ की गई, जिसमें आश्रम के सभी बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

*बुजुर्गों के चेहरे पर मुस्कान, माहौल हुआ भावुक*

आश्रम में निवासरत वरिष्ठजनों के साथ गणतंत्र दिवस मनाते हुए अतिथियों ने उनसे संवाद किया, हालचाल जाना और अपनत्व का भाव व्यक्त किया। बुजुर्गों के चेहरों पर दिखाई दी खुशी और संतोष ने इस आयोजन को भावनात्मक रूप से अत्यंत विशेष बना दिया।

*समाजसेवियों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति*

कार्यक्रम में पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष एवं विशेष अतिथि श्री मीठाराम पिंजानी, समाजसेवी एवं प्रवक्ता श्री कमल नागपाल,श्री द्वारकाधीश मोहनानी,श्री हरीश तीर्थनी एवं श्रीमती रीना तीर्थनी विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने श्री दादाजी वृद्ध आश्रम द्वारा किए जा रहे निःस्वार्थ सेवा कार्यों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अनुकरणीय बताया।

### **सेवा, सम्मान और सुरक्षा का केंद्र है श्री दादाजी वृद्ध आश्रम**

श्री दादाजी वृद्ध आश्रम न केवल बुजुर्गों को आश्रय प्रदान करता है, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, पोषण आहार और पारिवारिक वातावरण भी उपलब्ध कराता है। यहाँ बुजुर्गों की देखभाल पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ की जाती है, जिससे वे अपने जीवन का संध्या काल सुकून और आत्मसम्मान के साथ व्यतीत कर सकें।

### **संचालन एवं व्यवस्थाओं की सराहना**

कार्यक्रम का सफल संचालन आश्रम की संचालिका **श्रीमती अनीता सिंह चौहान** के मार्गदर्शन में हुआ। आश्रम प्रबंधक **श्री मुकेश मैथिल** ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सहयोग से ही ऐसे आयोजनों से बुजुर्गों के जीवन में खुशी लाई जा सकती है। आयोजन में **भारती नलवाडे, राहुल अमोदे** सहित सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

### **समाज से सहयोग की अपील**

आश्रम प्रबंधन ने समाज से अपील की कि वे बुजुर्गों की सेवा हेतु आगे आएं, समय-समय पर आश्रम में आकर उनसे संवाद करें और इस मानवीय सेवा अभियान में सहभागी बनें।

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